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रायपुर में सफाई व्यवस्था पर संकट, भुगतान नहीं मिलने से ठेकेदारों ने बंद किया काम, 70 वार्ड प्रभावित

On: June 3, 2026 2:28 PM
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रायपुर। राजधानी रायपुर में नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पिछले चार महीनों से भुगतान नहीं मिलने से नाराज सफाई ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है, जिसका असर शहर के सभी 70 वार्डों में दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में कचरे का उठाव प्रभावित होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सफाई ठेकेदारों का आरोप है कि वे लंबे समय से बकाया भुगतान की मांग कर रहे थे। इस संबंध में नगर निगम प्रशासन को कई बार आवेदन और ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। आर्थिक दबाव बढ़ने और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में दिक्कत आने के बाद उन्होंने काम बंद करने का फैसला लिया।

हजारों कर्मचारियों की आजीविका पर असर

ठेकेदारों के मुताबिक प्रत्येक ठेकेदार के अधीन करीब 40 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका पिछले चार महीनों से प्रभावित हो रही है।

अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में सफाई ठेकेदार और कर्मचारी बूढ़ा तालाब परिसर में एकत्र हुए और मीडिया के सामने अपनी समस्याएं रखीं।

सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल

सफाई कार्य बंद होने के बाद शहर में कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सफाई कर्मचारियों और ठेकेदारों को समय पर भुगतान नहीं मिलेगा तो शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

मामले को लेकर पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सफाई व्यवस्था लगातार खराब होती जा रही है, जबकि दूसरी ओर यूजर चार्ज बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई वार्डों में नियमित कचरा उठाव नहीं हो रहा है और नालियां गंदगी से भरी हुई हैं। ऐसे में जनता सवाल कर रही है कि जब मूलभूत सुविधाएं ही बेहतर नहीं मिल रही हैं तो बढ़ा हुआ यूजर चार्ज किस आधार पर लिया जा रहा है।

कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी

विकास उपाध्याय ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो कांग्रेस पार्टी विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि शहर में जमा कचरे को प्रतीकात्मक रूप से भाजपा जनप्रतिनिधियों के निवास तक पहुंचाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।

फिलहाल नगर निगम प्रशासन और ठेकेदारों के बीच समाधान की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन भुगतान को लेकर विवाद बढ़ने से राजधानी की सफाई व्यवस्था पर संकट गहराता नजर आ रहा है।

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