रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवार बारिश और कीचड़ के बीच अपने क्षतिग्रस्त मकानों में रहने को मजबूर हैं। इस बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने गांव पहुंचकर प्रभावित लोगों से मुलाकात की, वहीं सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
बारिश के बीच धरने पर बैठे ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि जिन मकानों पर कार्रवाई हुई, उनमें रहने वाले कई परिवारों के पास फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लोग टूटे हुए मकानों और खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवार गांव में ही धरना देकर प्रशासन से राहत और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
EWS आवास को लेकर भी नाराजगी
प्रशासन की ओर से कुछ परिवारों को ईडब्ल्यूएस (EWS) आवास आवंटित किए गए हैं। हालांकि प्रभावित लोगों का कहना है कि सभी परिवारों को आवास नहीं मिला है। जिन लोगों को मकान मिला है, उनका आरोप है कि वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और मकान पूरे परिवार के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर भी प्रदर्शन किया।
बृजमोहन अग्रवाल ने उठाए सवाल
भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि रात के समय मकानों को तोड़ने की कार्रवाई उचित नहीं थी। उन्होंने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि वे प्रभावित ग्रामीणों के साथ खड़े हैं। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में लोगों को इस तरह बेघर करना मानवीय दृष्टि से सही नहीं है।
पहले मिला था आश्वासन
ग्रामीणों का दावा है कि कार्रवाई से पहले उन्हें यह आश्वासन दिया गया था कि बारिश के दौरान कोई तोड़फोड़ नहीं होगी और प्रशासन बातचीत के माध्यम से समाधान निकालेगा। इसके बावजूद 29 जून को गांव के लगभग 80 मकानों पर बुलडोजर चलाया गया।

वायरल हुआ पुराना पत्र
नकटी गांव मामले के बीच सांसद बृजमोहन अग्रवाल का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखा एक वर्ष पुराना पत्र भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। पत्र में उन्होंने विधायक कॉलोनी के लिए भूमि चयन को लेकर आपत्ति जताई थी और गरीब परिवारों को हटाए जाने पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की बात कही थी।








