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गरीबों के ठेले हटे, लेकिन भू-माफियाओं पर कार्रवाई कब? कोर्ट के सामने सरकारी जमीन पर अवैध प्लाटिंग का मामला गरमाया

On: May 28, 2026 9:51 AM
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खैरागढ़। खैरागढ़ शहर में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ न्यायालय परिसर के सामने सड़क किनारे वर्षों से रोजी-रोटी चला रहे छोटे ठेले और खोमचे हटाने के लिए प्रशासन सक्रिय नजर आया, वहीं उसी परिसर के सामने सरकारी जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग और कब्जों के मामले में आठ महीने बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसे लेकर प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

मामला एडवर्ड पार्क के सामने स्थित न्यायालय परिसर से लगी नजूल भूमि का है। तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी की संयुक्त जांच में यह सामने आया कि नजूल प्लॉट नंबर 114 और 115, मूल खसरा नंबर 169 की सरकारी जमीन को बिना वैधानिक अनुमति 22 हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों को बेचा गया।

जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में इस जमीन पर 17 लोगों का कब्जा है और कई जगहों पर पक्के निर्माण भी किए जा चुके हैं। राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर 169 का कुल रकबा 2.259 हेक्टेयर दर्ज है, जिसकी भूमि प्रकृति “छोटे झाड़ का जंगल एवं घास भूमि” बताई गई है। नियमानुसार ऐसी जमीन का निजी उपयोग, प्लाटिंग या विक्रय नहीं किया जा सकता।

इसके बावजूद लगभग 85,627 वर्गफीट सरकारी जमीन की रजिस्ट्री अलग-अलग लोगों के नाम किए जाने का मामला सामने आया है। नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने भी अपनी जांच में स्पष्ट किया है कि संबंधित भूमि का कोई वैध ले-आउट स्वीकृत नहीं किया गया था और पूरी प्रक्रिया अवैध प्लाटिंग की श्रेणी में आती है।

इसके बाद 29 सितंबर 2025 को कलेक्टर कार्यालय ने नगर पालिका परिषद को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन आदेश के आठ महीने बाद भी न तो अवैध निर्माण हटाए गए और न ही कथित जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हुई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस न्यायालय परिसर के सामने गरीबों के ठेले हटाने की कार्रवाई की गई, उसी परिसर के सामने सरकारी जमीन पर हुए कथित अवैध कब्जे आज भी जस के तस बने हुए हैं। मुख्य मार्ग से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई छोटे दुकानदारों ने डर के कारण अपना सामान तक समेट लिया। पालिका कर्मचारी और पुलिस बल घंटों मौके पर मौजूद रहे, लेकिन नगर पालिका और राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। अंततः केवल दो ठेले जब्त कर औपचारिक कार्रवाई पूरी कर दी गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीब और छोटे व्यवसायियों पर प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता है, लेकिन करोड़ों की सरकारी जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई केवल फाइलों और विभागीय पत्राचार तक सीमित रह जाती है।

सूत्रों के अनुसार “मेंटेनेंस खसरा” के नाम पर शहर की अन्य सरकारी जमीनों में भी इसी तरह कब्जे और प्लाटिंग का खेल लंबे समय से जारी है। अटल परिसर और कोर्ट परिसर के आसपास की जमीनों को लेकर भी पहले विवाद सामने आ चुके हैं।

मामले में उप पंजीयक कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नगर एवं ग्राम निवेश विभाग की अनुमति के बिना ही रजिस्ट्रियां की गईं, जबकि राजस्व विभाग, एसडीएम कार्यालय और नगर निवेश विभाग अपनी जांच में प्लाटिंग को अवैध बता चुके हैं।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय एसआईटी जांच कराने, सभी 22 रजिस्ट्रियों को निरस्त करने, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और भू-माफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

नगर पालिका परिषद के सीएमओ पुनीत राम वर्मा ने कहा कि उन्होंने दो महीने पहले ही पदभार ग्रहण किया है और फाइलों का परीक्षण करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं नजूल अधिकारी रेणुका रात्रे ने बताया कि अवैध प्लाटिंग की पुष्टि के बाद नगर पालिका को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन की कार्रवाई केवल कमजोर और छोटे कारोबारियों तक सीमित रहेगी, या फिर सरकारी जमीन पर हुए कथित अवैध कब्जों और प्लाटिंग पर भी वैसी ही सख्ती दिखाई जाएगी।

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